देवतालाब शिव मंदिर

देवतालाब शिव मंदिर

रेवा इलाके के देवतालाब में स्थित शिव अभयारण्य काफी समय से क्षेत्र के लोगों के बीच आस्था का केंद्र रहा है। काफी लोग इसे देवतालाब शिव मंदिर के बनाम से भी जानते है |लगातार कई प्रशंसक अभयारण्य में शिव अभयारण्य का दौरा करते हैं, लाखों लोग भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के लिए हर जगह से अभयारण्य में आते हैं। सावन के लंबे खंड में शिव अभयारण्य में प्रशंसकों की भारी भीड़ रेहती है।

देवतालाब अभयारण्य के निवासियों के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि यह विशाल शिव मंदिर एक एकान्त पत्थर से बना हुंआ है । यह स्वीकार किया जाता है कि इस अभयारण्य को कुछ समय के लिए इकट्ठा किया गया था और इसे स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था। देवतालाब अभयारण्य के बारे में कहा जाता है कि यह अभयारण्य ऐक हि रात में बनाया गया था ।

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यह व्यक्त किया जाता है कि शाम के समय के आसपास कोई मंदिर  नहीं था, सिवाय इसके कि जब लोगों ने इसे दुसरे दिन की शुरुआत में देखा, तो यहां एक विशाल अभयारण्य पाया गया, फिर भी किसी को पता नहीं चला कि अभयारण्य का निर्माण किसने किया और यह कैसे किया।

देवतालाब शिव मंदिर के बारे में :

शिव मंदिर का इतिहास:

देवतालाब शिव मंदिर
देवतालाब शिव मंदिर

 

महर्षि मार्कंडेय सनातन और शिव भक्ति के प्रतिपादन के लिए भारत में जाते थे। अपने भ्रमण में, वे विंध्य के रीवा इलाके में दिखाई दिए, जिसे अब रीवा के नाम से जाना जाता है। जिस समय महर्षि ने रीवा में देवतालाब नामक स्थान पर विश्राम के लिए अपना डेरा बनाया, तो कहीं से भी उनमें भगवान शिव को देखने की लालसा उत्पन्न हुई।

जब महर्षि शिव के प्रशंसक बन गए, तो उन्होंने अपने आराध्य को बता दिया कि वे जिस भी संरचना में दर्शन प्राप्त कर सकते है करेंगे , लेकिन जब तक उन्हें दर्शन नहीं मिलते, वे यहां पर से कही नही जायेंगे।

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काफी देर तक महर्षि मार्कंडेय देवतलाब में चिंतन करते रहे। उनकी पश्चाताप की शक्ति को देखकर, भगवान शिव ने विश्वकर्मा से उस स्थान पर एक शिव अभयारण्य का निर्माण करने का अनुरोध किया। शासक विश्वकर्मा ने उस स्थान पर कुछ समय के लिए एक भीषण पत्थर से शिव अभयारण्य का निर्माण किया। मुआवजे में फंसे महर्षि मार्कंडेय को इस पूरे प्रकरण का जरा भी अहसास नहीं हुआ।

अभयारण्य के निर्माण के बाद, महर्षि ने भगवान शिव की प्रेरणा से अपना प्रायश्चित समाप्त किया। महर्षि शिव अभयारण्य को देखकर असाधारण रूप से संतुष्ट थे और उन्होंने वहां स्थित कुंड में स्नान करके भगवान शिव की पूजा की। उस समय से पूरे विंध्य प्रदेश में इस अभयारण्य का सम्मान किया जाता है।

शिव मंदिर कैसे पहुचे :

देवतालाब शिव मंदिर
देवतालाब शिव मंदिर

निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज में है। प्रयागराज से रीवा की दूरी करीब 125 किलोमीटर है। इसके अलावा, रीवा वाराणसी और जबलपुर से भी समान दूरी पर है, जिसमें हवाई अड्डे हैं। रीवा से इन दोनों शहरों की दूरी करीब 250 किमी है। रीवा दिल्ली, राजकोट, इंदौर, भोपाल और नागपुर जैसे शहरों से रेल द्वारा सीधे जुड़ा हुआ है। देवतालाब मंदिर रीवा रेलवे स्टेशन से लगभग 60 किमी की दूरी पर मिर्जापुर मार्ग पर स्थित है।

सड़क मार्ग से भी यहां पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं है। वाराणसी से जबलपुर होते हुए मिर्जापुर जाने वाले यात्री देवतातालब में भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं, क्योंकि यह मंदिर मुख्य मार्ग पर स्थित है।

मंदिर के नीचे एक और मंदिर है, यह भी एक मान्यता है

देवतालाब शिव मंदिर
देवतालाब शिव मंदिर

मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर के नीचे शिव का एक दूसरा मंदिर भी है जिसमें एक चमत्कारी रत्न मौजूद है। कई साल पहले मंदिर के तहखाने से सांप और बिच्छुओं के लगातार निकलने के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे। मंदिर के सामने एक किला भी मौजूद था, इस जगह के राजा नास्तिक थे।

कहा जाता है कि राजा ने इस मंदिर को गिराने की योजना बनाई थी, जैसे ही राजा ने योजना शुरू की, अचानक जमीन के नीचे दबकर पूरा वंश नष्ट हो गया।

मान्यता है कि देवतालाब के दर्शन से चारोधाम की यात्रा पूरी होती है। मंदिर से भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है, यहां हर साल तीन मेले लगते हैं और इसी आस्था के साथ हर महीने हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

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