मोती डूंगरी शिव मंदिर

मोती डूंगरी शिव मंदिर जयपुर : एकलिंगेश्वर शिव मंदिर

एकलिंगेश्वर मंदिर जयपुर के मोती डूंगरी क्षेत्र में स्थित है। इसे  मोती डूंगरी शिव मंदिर भी  कहा जाता है।राष्ट्र के पुराने इतिहास और उनके अवसरों को संप्रेषित करने वाले कई दिव्य मंदिरे हैं। संयोग से, भारत में कई शिव अभयारण्य हैं, जहां उत्साही और शिवप्रेमी  लोगों को पहुंचने के लिए बहुत ही अनुपलब्ध यात्रा करने की आवश्यकता होती है। इसी क्रम में आज हम आपको भगवान शिव के एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देंगे, जहां जाणे के लियो भक्तो को पुरे साल तक इंतजार करणा पडता है ।

यहां लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर आते हैं |जयपुर में एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर, जो एक साल में सिर्फ शिवरात्रि को खुलता है। इस अभयारण्य की दीवारें, जहां गुलाबी शहर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की कई कहानियां ढकी हुई हैं, एक अन्य घटक हैं जो उन्हें इन अभयारण्यों के समान नहीं बनाती हैं। इस दिन, प्रेमी इसके उद्घाटन के लिए कसकर बैठते हैं और लंबी लाइनों में लगके शिवजी के दर्शन होणे का इंतजार करते है ।

मोती डूंगरी शिव मंदिर:

कहा स्तिथ है मोती डूंगरी शिव मंदिर? :

मोती डूंगरी शिव मंदिर
मोती डूंगरी शिव मंदिर

एकलिंगेश्वर मंदिर जयपुर के मोती डूंगरी क्षेत्र में स्थित है|यह मंदिर जेडीए के कार्यालय के विपरीत स्थित एक ढलान के उच्चतम बिंदु पर स्थित है। गली से सटे इस ढलान के निचले हिस्से में रमणीय बिरला मंदिर है। यदि आप दिन के किसी भी समय इस स्थान से गुजरते हैं, तो यहां का अद्भुत दृश्य आप पर छा जाएगा। रात के समय यहां का नजारा काफी मनमोहक होता है।

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मंदिर का इतिहास :

मोती डूंगरी शिव मंदिर
मोती डूंगरी शिव मंदिर

जानकारी के अनुसार एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर कई साल पुराना है , और इस मंदिर की स्थापना जयपुर की स्थापना से भी पहले की गई थी। एकलिंगेश्वर महादेव का मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है और शिवरात्रि के दिन सुबह से ही भक्तों का तांता लग जाता है। जब एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना हुई तो उनके परिवार सहित भगवान शिव की मूर्तियां भी स्थापित की गईं, लेकिन कुछ समय बाद शिव परिवार मंदिर से गायब हो गया।

वहीं, कुछ समय बाद इस मंदिर में एक बार फिर शिव परिवार की स्थापना हुई लेकिन फिर से यहां सभी मूर्तियां गायब हो गईं। तभी से एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर को चमत्कारी मंदिर कहा जाने लगा और तब से किसी अप्रिय घटना के डर से शिव परिवार की मूर्ति यहां फिर कभी स्थापित नहीं की गई।

शिवरात्रि के दिन पहले जयपुर के राजपरिवार ने एकलिंगेश्वर महादेव की पूजा की, फिर यहां आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की।यह मंदिर साल में एक बार ही खुलता है, इसलिए शिवरात्रि के दिन भक्तों में इसके प्रति विशेष आकर्षण होता है। करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई और कई घंटों तक लाइन में खड़े रहने के बाद लोग यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं।

शिव की आराधना और  प्रथा-परंपरा :

मोती डूंगरी शिव मंदिर
मोती डूंगरी शिव मंदिर

एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर में, किसी शाही परिवार के शासन के दौरान, यहां शिव की पूजा कि जाती थी। सहस्त्रघाट रुद्राभिषेक सावन काल में निरन्तर होता रहा। इस अभयारण्य से जुड़ी हर एक लागत शाही परिवार द्वारा वहन की जाती थी और आम जनता यहां हर शिवरात्रि में दर्शन के लिए आती थी।

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मंदिर की प्रतिभा:

मोती डूंगरी शिव मंदिर
मोती डूंगरी शिव मंदिर

जयपुर के लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के लोगों को भी इस अभयारण्य में काफी विश्वास है। यही वजह है कि शिवरात्रि से रोजाना यहां के गर्भगृह के सामने प्रशंसकों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। शिवरात्रि के आगमन पर, दर्शन के लिए अभयारण्य में आने वाले प्रशंसकों की कतार कुछ किलोमीटर लंबी होती है और इस अवसर पर यातायात को पुनर्निर्देशित किया जाता है । एकलिंगेश्वर महादेव के प्रति उत्साही लोगों का विश्वास बहोत जादा हि है |शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में विशेष सजावट की जाती है जो सभी भक्तों का मन मोह लेती है।

 

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